Saturday 29 December 2012

गरीबी, बेरोजगारी और परिवार का बोझ

झारखंड में ह्यूमन ट्रैफिकिंग 

रांची : 27 दिसंबर । मानव तस्कर झारखंड में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं. गरीबी, बेरोजगारी और परिवार के बोझ तल झारखंड की लड़कियां आसानी से इस जाल में फंस जाती हैं. हाल में ही दिल्ली से छुड़ाये गये 84 नाबालिग लड़कियों में 29 लड़कियां झारखंड की हैं. सभी को काम दिलाने का लालच देकर दिल्ली ले जाया गया. वहां नौकरों से भी बदतर काम लिया गया. हालिया घटनाओं में एक लड़की तो प्रताड़ित करने का मामला सामने आया था. वह किसी तरह बच कर भागी थी.इससे पहले भी झारखंड की कई लड़कियों को दिल्ली से छुड़ाया जा चुका है.

सक्रिय हैं दलाल, बेच देते हैं लड़कियां

झारखंड के कई पिछड़े जिलों में दलाल सक्रिय हैं. सिमडेगा, गुमला, लातेहार, पलामू, गढ़वा आदि जगहों से लड़कियों को काम दिलाने के बहाने दूसरे राज्यों में ले जाते हैं. वहां उन लड़कियों को बेच देते हैं. यहां कि अधिकतर लड़कियों को दिल्ली में बेच दिया जाता है. वहां उन नाबालिग लड़कियों को घर का नौकर बना दिया जाता है.

बदलनी होगी मानसिकता

झारखंड के कई गांवों से आज भी पलायन जारी है. मनरेगा व अन्य सरकारी योजनाओं के बावजूद झारखंड के युवा पलायन कर रहे हैं.सरकार युवाओं को रोजगार नहीं दे पा रही है, लेकिन कई दावे हैं. वर्ष 2012 बिटिया वर्ष मनाने के बाद वर्ष 2013 युवाओं के कौशल वर्ष के रूप में मनायेगी. जमीनी हकीकत यह है कि झारखंड के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए भी दूसरे राज्यों में पलायन करा पड़ता है.

1 comment:

  1. सो गया है सारा जहां...........रक्षक ही हो गयें हैं भक्षक........मीडिया की भूमिका है अहम्........... आप जगाते रहें............आपका प्रयास होगा सफ़ल...........बदलेगा सूरत-ए-हाल ज़रूर..............हमारी उम्मीदें, शुभकामनाएं हैं आपके साथ ........

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